Windows 10 के साथ माइक्रोसॉफ्ट में काफी सारे बदलाव आए हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने एंड यूजर लाइसेंस एग्रीमेंट (EULA ) को ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए बदल दिया है जिससे यह रिमोट के जरिए आपके मशीन से पाइरेटेड सॉफ्टवेयर को डिलीट कर देगा। EULA ने कहा, ‘कभी-कभी सर्विसेज को जारी रखने के लिए आपको सॉफ्टवेयर अपडेट की जरूरत होगी। हम आपके सॉफ्टवेयर के वर्जन को ऑटोमैटिक ही जांच कर सकते हैं और साथ ही सॉफ्टवेयर अपडेट्स को डाउनलोड या कंफीगुरेशन में बदलाव कर सकते हैं।‘
अब यह बड़ा बदलाव डेस्क्टॉप क्लास ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए है। भारत और चीन जैसे बढ़ रहे बाजारों में उपलब्ध कंप्यूटर्स में सॉफ्टवेयर के पाइरेटेड कॉपी चलाए जाते हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने Windows 10 का फ्री अपग्रेड Windows 7 व 8 के पाइरेटेड यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया।. वैसे यूजर्स जो Windows के पाइरेटेड कॉपीज को चलाते हैं वे भी Windows 10 का अपग्रेड बिना किसी दिक्कत के पा सकते हैं बशर्ते की वह ऑपरेटिंग सिस्टम पाइरेटेड है इस बात की जानकारी यूजर को होनी चाहिए।
यदि आप Windows 10 पर अवैध तरीके से गेम्स व स्टीम जैसे सर्विसेज को एक्सेस करते हैं या अवैध एंटी वायरस सॉफ्टवेयर को चलाते हैं तो माइक्रोसॉफ्ट इसे खुद-ब-खुद इसे डिलीट कर देगा, पर अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि आप पाइरेटेड सॉफ्टवेयर चला रहे हैं इसकी पहचान माइक्रोसॉफ्ट कैसे करेगा। पर इतना तो तय है कि आपके सिस्टम पर माइक्रोसॉफ्ट की तीखी निगाहें हमेशा बनी रहेंगी।
Windows 10 ऑपरेटिंग सिस्टम विभिन्न हार्डवेयर- फोंस, टैबलेट्स, नोटबुक्स, डेस्कटॉप्स, वियरेबल्स, गेम कंसोल्स और IoT हार्डवेयर पर चलता है।
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