Rakesh Baloda Rakesh Baloda Author
Title: महिलाओं को आसान शिकार मानते हैं साइबर अपराधी, जागरूकता है जवाब
Author: Rakesh Baloda
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साइबर जगत और इसमें अंजाम दिए जाने वाले अपराध देश की सुरक्षा व्यवस्था के सामने हर रोज एक नई चुनौतीं पेश कर रहे हैं। खासतौर पर महिलाएं इस ...
साइबर जगत और इसमें अंजाम दिए जाने वाले अपराध देश की सुरक्षा व्यवस्था के सामने हर रोज एक नई चुनौतीं पेश कर रहे हैं। खासतौर पर महिलाएं इस वर्चुअल वर्ल्ड में दुर्भावनापूर्ण अपराधों की लगातार शिकार हो रही हैं। वास्तव में, भारत में कुछ खास तरह के साइबर क्राइम महिलाओं पर ही अंजाम दिए जाते हैं। यह एक बेहद खतरनाक स्थिति है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां तेजी से बढ़ते इन अपराधों को रोकने और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने की हर संभव कोशिश कर रही हैं।
इन हालात का प्रभावी तरीके से मुकाबला करने के लिए जरूरी है जागरूकता। महिलाओं के बीच उन अपराधों और आपराधिक तरीकों को लेकर जागरूकता फैलाने की जरूरत है, जो सिर्फ उन्हें निशाना बनाकर अंजाम दिए जा रहे हैं।
महिलाओं को निशाना बनाकर सबसे ज्यादा जिस अपराध को अंजाम दिया जाता है, वह है- साइबर स्टाकिंग यानी साइबर वर्ल्ड में पीछा करना या पीछे से हमला करना। बार-बार टेक्स्ट मैसेज भेजना, मिस्ड कॉल करना, फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना, स्टेटस अपडेट पर नजर रखना और इंटरनेट मॉनिटरिंग इसी अपराध की श्रेणी में आते हैं। आईपीसी की धारा 354डी के तहत यह दंडनीय अपराध है।
साइबर स्पाइंग भी एक अन्य तरह का साइबर अपराध है। आईटी एक्ट की धारा 66ई के तहत यह दंडनीय अपराध है। इसमें चैंजिंग रूम, लेडिज वॉशरूम, होटल रूम्स और बाथरूम्स आदि स्थानों पर रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाए जाते हैं।
तीसरे तरह का अपराध जो महिलाओं पर केंद्रीत है- वह है साइबर पॉर्नोग्राफी। इसके तहत महिलाओं के अश्लील फोटो या वीडियो हासिल कर उन्हें ऑनलाइन पोस्ट कर दिया जाता है। अधिकांश मामलों में अपराधी फोटो के साथ छेड़छाड़ करते हैं और बदनाम करने, परेशान और ब्लैकमेल करने के लिए उनका इस्तेमाल करता है। इस तरह के अपराधों में आईटी एक्ट की धारा 67 और 67ए के तहत केस चलता है।
साइबर बुलिंग इसी क्रम में चौथे तरह का अपराध है। इसको बड़े ही शातिर तरीके से अंजाम दिया जाता है। साइबर अपराधी पहले महिलाओं या लड़कियों से दोस्ती गांठते हैं और फिर उन्हें अपना शिकार बनाते हैं। विश्वास में लेकर और लालच के चलते नजदीकियां बढ़ाने के बाद महिला या लड़की के निजी फोटो हासिल कर लेेते हैं। इसके बाद पीड़िता से मनचाहे काम करवाने के लिए ब्लैकमेल करते हैं। साइबर बुलिंग का दुष्परिणाम है कि कई मामलों में युवा लड़कियों से रेप हुए हैं, उनका यौन उत्पीड़न हुआ है, वहीं अधिक उम्र वाली महिलाओं को पैसों के लिए ब्लैकमेल किया गया है। वक्त आ गया है कि महिलाएं उक्त जोखिमों में समझें और साइबर जगत में अपने ऊपर मंडरा रहे खतरों को लेकर तत्काल जागरूक बनें।
भारत में जागरुकता का अभाव
- संयुक्त राष्ट्र संघ की सितंबर 2015 की रिपोर्ट की मानें तो भारत में केवल 35 फीसदी महिलाओं ने ही अपने खिलाफ हुए साइबर अपराध की शिकायत की। वहीं साइबर अपराध से पीड़ित लगभग 46.7 फीसदी महिलाओं ने किसी तरह की कोई शिकायत नहीं की। 18.3 फीसदी महिलाओं को तो अंदाजा ही नहीं था कि वे साइबर अपराध का शिकार हो रही हैं।
- यूनाइटेड स्टेट्स ब्रॉडबैंड कमीशन की "कॉम्बेटिंग ऑनलाइन वायलैंस अगेंस्ट वीमेन एंड गर्ल्स: ए वर्ल्डवाइड वेकअप कॉल" शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली लगभग एक तिहाई महिलाएं किसी-न-किसी तरह के साइबर अपराध का शिकार होती हैं।
समय रहते कदम उठाने के फायदे
इसी साल मार्च की बात है। मप्र के ग्वालियर में दसवीं की छात्रा का फोटो प्रोफाइल में लगाकर एक जालसाज ने फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बना दिया। जब छात्रा को पता चला तो उसने अपने भाई के साथ जाकर साइबर सेल में शिकायत की। साइबर सेल ने तुरंत अकाउंट ब्लॉक कर दिया।
एक पहलू यह भी
सोशल नेटववर्किंग साइट फेसबुक पर आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों द्वारा किए जाने वाले कमेंट्स और तस्वीरों को बड़ी असानी से लाइक और शेयर करते हैं। लेकिन आपके इन लाइक्स और शेयर का कुछ लोग गलत फायदा उठा रहे हैं जो आपके लिए खतरनाक हो सकता है। सोशल नेटवर्किंग साइट पर आप जिन पोस्ट और तस्वीरों को लाइक और शेयर करते हैं उन पर कुछ हैकर्स की नजर रहती है। यह हैकर्स आपने जिस तस्वीर या पोस्ट का लाइक या शेयर किया है उसे बदल कर आपत्तिजनक कंटेट डाल देते हैं।
महिलाएं ऐसे रहें सुरक्षित
महिलाओं को उस शख्स की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करना चाहिए, जिन्हें वे जानती नहीं हैं।
असल दुनिया में जिसे आप जानते हैं और विश्वास करते हैं, उन्हें ही वर्चुअल वर्ल्ड मेंं फ्रेंड बनाएं। इंटरनेट या साइबर स्पेस पर किसी भी स्थिति में अपनी निजी जानकारी या तस्वीरें शेयर नहीं करना चाहिए।
सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को खासतौर पर सावधान रहना चाहिए कि कहीं किसी तरह का कैमरा या रिकॉर्डिंग डिवाइस तो नहीं है? अवांछित और बार-बार के एसएमएस, ईमेल, कॉल्स, फ्रैंड रिक्वेस्ट को लेकर भी उन्हें खुद को बचाना चाहिए।
जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी जानकार व्यक्ति या सुरक्षा एजेंसी को इसकी जानकारी देना चाहिए। पुलिस और सुरक्षा एजेसियां आपकी सेवा के लिए हैं। यह उनका दायित्व है कि वे सुरक्षा संबंधी आपकी समस्याओं का हल करें।
(लेखक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पद पर इंदौर में पदस्थ हैं और विचार उनके व्यक्तिगत हैं। )

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